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Thursday, 12 July 2018

उत्तराखंड मोटरसाइकिल यात्रा भाग 5- चकराता का टाइगर फॉल और शराबखोर टूरिज्म



टाइगर फॉल चकराता-एशिया का सबसे अधिक ऊँचाई वाला डायरेक्ट वाटर फॉल
भाग - 5
08 जून 2018

जैसा कि पिछली पोस्ट में,आपने पढ़ा - सुबह  हम लोखंडी गाँव से मोइला डांडा ट्रैक पर गए थे।वापस लोखंडी आते-आते दोपहर के 3 बज़ गए थे।
लोखंडी आते ही होटल से नीरज और मैने अपना अपना सामान उठाया,दीप्ति ने दोनों गाड़ियों पर समान बंधवाने में मदद की। समान बंधते ही में अपनी बुलेट और नीरज-दीप्ति अपनी डिस्कवर मोटरसाइकिल पर टाइगर फॉल पहुँचने का इरादा पक्का कर रवाना हो गए।
कभी पक्की तो कभी के कच्ची सड़क से होते हुए 4 बज़े चकराता पहुँच गए।
चकराता से रोड़ की स्थिति बिल्कुल बदल जाती है,बढ़िया सिंगल लेन डामर सड़क मिली,और हम टाइगर फॉल की राह पर चल पड़े।
वैसे तो चकराता से टाइगर फॉल का 5 किलोमीटर का ट्रैकिंग वाला रास्ता भी है,लेकिन अधिकांश पर्यटक और घुम्मकड़ वाहन मार्ग से जाना ही पसन्द करते है।
चकराता से टाइगर फॉल की दूरी 19 किलोमीटर ही थी। फिर भी चकराता से बाहर निकलते ही एक बढ़िया लोकेशन देखकर नीरज का मन डांवाडोल होने लगा। मुझसे कहा-यहीं रुक जाते है। तब हम तीनों एक होटल के बाहर ही खड़े थे,में और दीप्ति इस ग़ुमनाम होटल में कमरा देखने चले गए,चौकीदार साहब हमें पहली मंजिल पर ले गए,पहली मंजिल का नज़ारा यह था कि बालकनी मे एक टेबल लगी है.. उस पर एक व्हिस्की की बोतल,तीन काँच के ग्लास सजाकर कर कुछ अंकल लोग हर फिक्र को धुंवे मे उड़ा रहे थे। चौकीदार साहब से हमनें वहीं पूछ लिया- नीचे कमरा खाली नही है क्या ? उन्होंने ने कहा नही जी...
दारू वाले अंकल लोग ने भी चौकीदार से कहा..सर को नीचे ही कमरे दिखाव यार..
पहली मंजिल के कमरे को देखा-अनदेखा कर हम नीचे आ गए...बाहर जाते जाते चौकीदार से ही कमरे का किराया पूछा...2500 रूपए बताया..
दीप्ति और मेरे नीचे आते ही नीरज ने पूछा..हाँ या ना ?
मेंने कहा नही यार ऊपर तो...
यहाँ से चल पड़े,उसके बाद सीधे टाइगर फॉल के पार्किंग पर ही रुके।पार्किंग पर्ची कटवाते समय नीरज ने काउंटर से ही कुछ होटल की लोकेशन पूछ ली थी। पार्किंग से टाइगर फॉल के लिए सड़क के उसी तरफ चल दिये।
थोड़ा आगे ही टेंट कैम्पिंग का बोर्ड देखा तो रुक गए,में और दीप्ति पूछताछ के लिए अंदर गए,अंदर का नज़ारा यह था कि..
लाइन से टेंट लगे है,काफी गंदगी में..
उसके बाहर ही गार्डन जैसा कुछ बना था,उसी गार्डन में आठ-दस लड़के अपने अपने हाथों में शराब का ग्लास लिए, तेज़ आवाज में बज रहे,गानों पर सिगरेट का धुँवा उड़ाते हुवे झूम रहे है। टेंट मालिक भी टुन्न था। हम यहाँ से भी आगें बढ़ गए।
थोड़ा आगे ही टाइगर फॉल के नाम से ही होटल मिला,बाहर कुछ पुरुष,महिला और दो लड़कियां बैठे हुवे बतिया रहे थे,हम यहाँ रुके और रूम के लिए पूछा,उन पुरुषों में से एक अंकल ने कहा हाँ आजाइये। 
प्रोटोकॉल के मुताबिक में और दीप्ति रूम देखने ऊपर आ गए,रूम देख कर निश्चित किया कि यहाँ कोई दारूबाज नही है। फिर बालकनी मे खड़े होकर भाव-ताव शुरू कर दिया,अंकल ने 1500 कहा,मैंने कहा नही 1200 देंगे,अंकल ने पहाड़ी अंदाज़ मे मुस्कुराते हुवे कहा नही जी बहुत कम हो जायेगा..मैंने कहा कोई बात नही 1300..बस इससे ज़्यादा नही..अंकल जी मुस्कुराते हुवे..अरे...इससे ज़्यादा कुछ कह पाते उससे पहले नीरज को आवाज़ लगा दी आओ भाई,आ जाव..1300 मे पक्का हो गया।
सारा सामान खोलकर कमरे में ले गए और बिस्तर पर पड़ गए,पड़ते ही तीनों के मुँह खुलते ही जगह जगह मिले दारू बाजों की कड़े शब्दों में निंदा शुरू हो गई,निंदा करते करते ही नीरज ने सारा हाल बयां करते हुवे फेसबुक पोस्ट भी लिख डाली,अब अगले चार पाँच दिनों तक हमारी पंचायत का प्रमुख विषय दारूबाज ही रहेंगे।
शाम के 6 बज़े हम तीनों,टाईगर फॉल देखने चल दिये,फॉल से आधा किलोमीटर पहले तक गाड़ी चली जाती है,वहीं गाड़ी खड़ी कर पैदल मार्ग पर चल दिये। वैसे फॉल तक पहुँचने के दो रास्ते है,एक रास्ता प्रमुख पार्किंग स्थल से ही है,पक्की पगडण्डी और सीढ़ियों से होता हुआ।दूसरा रास्ता,पार्किंग काउंटर से ही थोड़ा आगे से है,जिससे हम जा रहे है। इस रास्ते से पैदल थोड़ा सा कम चलना पड़ता है। क़रीब आधा किलोमीटर बाद दोनों रास्ते मिल जाते है..वहीं कुछ राजमा चावल,पकोड़ी,चाय की कुछ दुकानें मिली,यहाँ भी वही माहौल मिला,हाथों में व्हिस्की के ग्लास,मुँह में सुलगती हुई सिगरेट... खैर हम आगें बढ़ गए।
यहाँ से एक पुल पर पहुँचते ही हमें टाइगर फॉल का दीदार हो गया..मैंने इससे पहले पचमढ़ी का बी फॉल और इंदौर के पास पातालपानी झरना,तिंछा फॉल,सीतलामाता फॉल देखे हुवे थे।
लेक़िन इस वाटर फॉल की ऊँचाई सारे झरनों मे उच्चतम है। क़रीब 312 फिट की ऊँचाई से विशाल जलधारा बीच मे बिना किसी रुकावट के सीधे नीचे,पानी के कुंड मे गिरती है। यह वाटर फॉल एशिया में सबसे अधिक ऊँचाई से से सीधे ज़मीन पर गिरने वाले रिकॉर्ड के सारे सबुत पेश कर रहा था। और वहाँ हम तीनों इसके गवाह थे। हाँ वाटर फॉल के सामने हम तीनों ही थे। शाम के सात बज़ने वाले थे,सारी भीड़ यहाँ से जा चुकी थी। फॉल के बिल्कुल सामने एक कोने पर में,दूसरे कोने पर नीरज खड़ा हो गया। दीप्ति का मन नहाने का था। तो वो धीरे धीरे कुंड की तरफ़ फिर फॉल के क़रीब जाने लगी,नीरज और में यही खड़े फ़ोटोग्राफ़ी में लग गए। यहाँ खड़े होकर जलधारा को झरने के उच्चतम बिंदु से निम्नतम बिंदु तक आते एकटक देखते हुवे वहीं खो गया।
जब दीप्ति की जलक्रीड़ा समाप्त हो गई। तो नीरज और में एकदूसरे को देखने लगें,इशारे होने लगे कि चलों नहाने,नीरज होटल से नहाने की तैयारी मे आया था, लेकिन यहाँ कहने लगा नहीं नहाऊंगा। मेरा मन हुवा तो चल दिया कुंड की तरफ़, पानी की बूंदे दूर तक आ रही थी,वहीं से स्नान शुरू हो गया,फिर और जरूरत लगी तो कुंड में एक डुपकी लगा ली। पचमढ़ी के बी फॉल मे तो बिल्कुल झरने के नीचे जाकर नहाया था,वहाँ जब सर पर 200 फिट की ऊँचाई से पानी गिरता है,तो खोपड़ी में मधुमक्खी (हनी बी) के डंक मारने जैसी चुभन महसूस होती है,इसीलिए उस फॉल का नाम ही बी फॉल पड़ गया। यहाँ भी झरने के बिल्कुल नीचे जाने का मन था,लेक़िन पानी के कुंड की गहराई कब अचानक बढ़ जाये,उसका कोई अंदाज़ा नही था। इसलिए डुबकी मारकर ही वापस आ गया। 
अब अंधेरा होना भी शुरू होने ही वाला था। हमें पैदल वापस गाड़ी तक भी जाना है,जल्दी वापसी शुरू की,टाइगर फॉल का अनुभव बढ़िया रहा,सुविधा भी सारी थी,महिला पुरुष दोनों के लिए चेंजिग रूम तक बने हुवे है।
जब होटल से निकले थे तो,अंकल ने खाने के लिए भी पूछा था। तो हमने मना कर दिया था,सोचा था बाहर ही राजमा चावल,मोमोज़ खा कर आएंगे। वापसी में फॉल के आसपास की दुकानों में ताक झाँक की तो कुछ ना मिला। हर क़रीब क़रीब सभी दुकान पर दारूबाजों ने हाथ मे व्हिस्की का ग्लास और मुँह में सिगरेट दबाए कब्ज़ा किये हुवे थे। दुकान मालिक भी इनकी ही ख़ातिरदारी में लगे रहना पसंद करते है। खैर...
हर जगह कोशिश कर ली,राजमा-चावल, मोमोज़ कुछ नही मिला,तो पहले सोचा बाज़ार में चलते है,लेक़िन वहाँ भी कैसा माहौल होगा इसका अंदाज़ा हमें था। तो अपने होटल वाले अंकल के रेस्टोरेंट में ही खाना बेहतर समझा,हमनें उन्हें पहले मना करा है तो क्या हुवा, देर से ही सही खाना तो मिलेगा। तब तक असली-नक़ली काजू बादाम ही खाते रहेंगे।
सारी कश्मकश से निपटने के बाद होटल पहुँच गए,अंकल को देखते ही कह दिया - अंकल जी फॉल में जाकर नहा लिए,मज़ा आ गया,नहाने के बाद तो हमें भूख लगने लगी है...
अंकल- क्या बनाऊ..?
अरे कुछ भी बना लो..
अरे एक काम करो कुछ भी रहने दो..पनीर-रोटी-चावल बना लो।
अंकल- ठीक है..बनते ही आवाज़ लगा दूँगा,आप लोग ऊपर जाकर आराम करो..
जब होटल से शाम को 6 बजे गए थे तो नीरज ने दारू फ़्री टूरिज्म को निशाना बना कर फेसबुक पोस्ट लिखी थी। उस पोस्ट की कमेंट्स में अच्छी खासी बहस शुरू हो गई थी,नीरज उसी में लग गया। में भी मोबाइल-कैमरे के फ़ोटो के साथ छेड़छाड़ करने लग गया,दीप्ति ने कपड़ो की धुलाई शुरू कर दी।
इस बीच होटल की पहली मंजिल यानि हमारे कमरे के पास वाले दो कमरों में कुछ युवकों की आवाजाही होने लगी...हमनें कोई विशेष ध्यान नही दिया।
रात के साढ़े आठ-नो बजे के लगभग नीचे से हमारें खाने का बुलावा आया गया। तीनों फुर्ती से नीचे आ गए,खाने की मेज़ पर पनीर की सब्ज़ी-रोटी,चावल सजकर सामने था। हमने भी इसका लक्ष्मी नारायण करने में देर नही की।
इस बीच अंकल जी से भी गुफ़्तगू चल रही थी। अंकल जी ने बताया- आपके पास के दोनों कमरों में हरियाणा से आये कुछ लड़के ठहरे है,मैंने उन्हें कमरे देने से मना कर दिया था,लेकिन वे मिन्नतें करने लगें कि कहीं कमरा खाली नही है,परदेशी है,आप ही कुछ कीजिए।
अंकल उनकी बातों से पिघल गए और उन्हें शोर शराबा ना करने की शर्त पर कमरे दे दिए।
इस वक़्त वे लोग अपने कमरे में दारू पार्टी का आयोजन कर रहे है।
हमारा खाना जारी था,तभी उन्ही हरियाणा वालों का एक साथी आया,चिप्स,कोल्डड्रिंक ले ली,और अंकल से मैगी बनाने की फ़रमाइश कर दी।
अंकल ने कहा- नहीं जी,अब और मैगी नही बनाऊंगा,समय बहुत ज़्यादा हो गया है। खाना बिल्कुल तैयार है,आप लोग जल्दी से नीचे आकर खाना खाइये। आप को जल्दी से खाना खिलाकर हमें घर भी जाना है।
(अंकल का घर होटल से 1-2 किलोमीटर दूर,गाँव मे है। दिन में पूरा परिवार होटल का कामकाज देखता है,रात को सोने, गाँव वाले घर चले जाते है।)  
लड़का बिना मैगी के ही ऊपर अपनी पार्टी में चले गया। हम भी अपना खाना पूरा होते ही कमरे में आ गए। पास वाले कमरों से शोर की आवाज़ और आवाजाही जारी थी। इधर हम तीनों को पूरे दिन मोइला टॉप ट्रैकिंग,दिन मे गाड़ी चलाने,और शाम को टाइगर फॉल में नहाने,फिर खाने के बाद नींद आ रही थी। तो सोने की तैयारी करने लगें।
इसी बीच दरवाज़ा खटखटाने की आवाज़ आई,खोलकर देखा तो अंकल थे। उन्होंने अपना विजिटिंग कार्ड देते हुवे कहा- ये लीजिए मेरा नंबर..हम सभी अब घर पर सोने जा रहे है। अगर पास के कमरे वाले आपको परेशान या किसी भी प्रकार का हंगामा करें तो मुझें तुरंत फ़ोन लगा लेना।
मैंने कहा- नहीं जी इसकी क्या जरूरत है..वो उनके कमरें में कुछ भी करे..हम तो तीनों थकें हुवे है..नींद आ जायेगी।
लेक़िन नीरज ने कहा- हाँ ठीक है...दे दीजिए..ऐसा कुछ हुवा तो में जरूर फ़ोन करूँगा। अंकल के जाते ही हम बेफ़िक्र होकर सो गए। मुझें तो आँख बंद करते ही नींद आ गई,नीरज-दीप्ति को भी आ ही गई होगी।
हम सभी गहरी नींद में होंगे तभी मुझें महसूस हुवा कि दरवाज़े पर ज़ोर की आवाज़ आई हो..और नीरज चिल्लाया हो कोंन है बे...
खैर तब में गहरी नींद में था..मेरी आँखें कुछ देर बाद खुली,तब बाहर से शौर शराबें की आवाज़ आ रही थी और नीरज खिडकी के पास मोबाइल हाथ मे लिए बैठा था। उसका सारा ध्यान बाहर ही था। मैने उससे ना कुछ पूछा, ना कुछ कहा...बिस्तर पर लेटे लेटे यह सब कुछ देखते रहा। 5-10 मिनीट बाद भी हंगामा वैसा ही रहा, बल्कि अब और उग्रता बढ़ने लगी,कभी नीचे से काँच के ग्लास फूटने की आवाज़ आती, तो कभी पतरे के पीटने की। इसका मतलब सारे शराबी नीचे ही थे,हमारे कमरे की खिड़की के बाहर भी बीच बीच मे आवाजाही हो रही थी। इसके साथ ही नीचे शराबियों की गाड़ियों में तेज़ आवाज़ मे गाने भी बज रहे थे।
इस घटनाक्रम के बीच नीरज ने अंकल जी को फ़ोन कर सारी स्थिति बता दी। उसके बाद मोबाइल से वीडियोग्राफ़ी भी चालू रखी। नीरज के फ़ोन करने के 10-15 मिनीट बाद अंकल जी होटल आ गए ...उन्होंने आते ही शराबियों को फटकार लगाई...शराबी भाई लोग अपने कमरे में घुसे ही थे कि अंकल जी के साथ दो तीन आदमी ऊपर आ गए। उन सभी ने पहले सारे शराबियों को दोनों कमरों से पकड़ पकड़ कर बाहर निकाला और फिर अंकल जी ने हमारा भी दरवाज़ा खड़कया और कहा- ये लोग आपको भी परेशान कर रहे ना.. चलो आ जाव नीचे...
अंकल जी के कहते ही नीरज-दीप्ति और में उनके साथ नीचे आ गए..आधी रात को क़रीब 8 शराबी, 3 गाँव वाले और हम तीनों बीच रोड़ पर शराबियों के हंगामे के बाद एक नए हंगामे की शुरुआत करने वाले थे।
नीरज ने एक हाथ से मोबाइल रिकॉर्डिंग चालू कर रखी दी...एक शराबी अभी भी नीचे नही उतरा था। नीरज ने उसको भी हाथ पकड़ के धक्का मारा और रोड़ पर ला दिया...

नीरज- *****, तुम लोगों ने कब से हंगामा काट रखा है, तुम्हारे कमरे के पास भी कोई ठहरा है।लेक़िन तुम ***** को कहा होश है।
तुम लोग दारु पिते और सो जाते या अपने कमरे में शोर करते...लेक़िन तुम कभी अपने कमरे की दीवार पिट रहे हो कभी हमारा दरवाज़ा पीट रहे हो..रोड़ पर ग्लास फोड़ रहे हो। अबे तुम सालो यहाँ आकर अपने शहर अपने प्रदेश को बदनाम करते हो...
डॉक्टर तू इनकी गाड़ी का फ़ोटो खेच, और इनके भी फ़ोटो खेच...सालों को दिल्ली पहुँच कर देखते है...

दीप्ति-तुम लोगों को कोई मतलब नहीं है कि पास में कोई सो रहा है,दिनभर के थकें हुवे है,साथ में महिला भी है....इंजॉय करने का ये कौन सा ढंग है...हमारे दरवाज़े पर मुक्का मार रहे हो...यहीं खड़े होकर सिगरेट पी रहे हो।सिगरेट का धुँवा अंदर भी फेल गया,मेरा दम घुटने लगा...
दीप्ति ग़ुस्से से तमतमाई हुई थी। और उसने उन सभी को ख़ूब ख़रीखोटी सुनाई। 
बीच बीच मे गाँव वाले भी उन लोगों को डंडा दिखाकर हड़का रहे थे...
शराबियों की हालत खराब हुई पड़ी थी।
इस बीच एक झूमता हुवा शराबी मुझे चुपचाप खड़ा देख कहने लगा...रे...भाई इनको आप बताव हम लोग मस्ती कर रहे थे लेकिन हमनें आप का दरवाज़ा नही कूटा...
में कुछ कहता उससे पहले नीरज ने उसकी कॉलर पकड़ ली और दूर हटाते हुवे कहा-अबे तू तो अलग हट जा...सबसे ज़्यादा तेरे ही गुर्दे फेल हो रहे है।
सारे शराबी,हमारें, अंकल जी के और गाँव वालों के हाथ पैर जोड़ रहे थे,उन्हें डर था कहीं उन लोगो की पिटाई शुरू न हो जाये।
अब अंकल जी के कुछ कहने की बारी आई...
अंकल जी- मुझें पता है,ये हरियाणा वाले अगर शराब पी लेते है तो उत्पाद मचाते ही है..इसलिए तुम लोगों को कमरे देने से मना कर दिया था...लेकिन तुम लोगों ने परदेशी होने की दुहाई दी तो तरस खा कर कमरे दे दिए..
लेक़िन तुम लोगों ने तो सोचा,अंकल तो चले गए है...करो हंगामा...
ये सर लोग दिल्ली से आये है...इनके साथ मेरी बहन/बेटी जैसी लड़की है.. इनके सामने तुम लोगों ने मेरी क्या इज्जत रखी..ऐसा कहते हुवे अंकल जी दीप्ति से माफी मांगने लगे...और कहने लगे हम सब आपके गुनहगार है...शराब के नशे में खड़े सारे भाइयों से भी कहा, इनसे माफी मांगों... और जल्दी से कमरें ख़ाली करो।
इन शराबियों में एक भाई साहब वक़ील थे..उन्होंने अपने सारे दोस्तों को कमरा खाली कर नीचे आने को कहा...और वक़ील साहब अंकल जी से कहने लगे...
वक़ील साहब- प्रधान जी हम सब को माफ़ करो...कमरा खाली कर रहे है..हमारी आई.डी दे दो और जो भी हिसाब हुवा हो बता दो..
अंकल ने रेस्टोरेंट की चाबियां घर से बुलवाई..उनकी बेटियों को रात के एक बज़े परेशान होना पड़ा। हिसाब चुकता कर वक़ील साहब और उनके पियक्कड़ मित्र चलते बने।
इस बीच शोर शराबा सुन कर गाँव के 4-5 युवक और एकत्रित हो गए,अंकल जी ने रोड़ पर ही कुर्सियां लगवाई और हमें बिठाया..अपनी बेटियों से सब के लिये चाय बनाने को कह दिया।
अंकल जी- अगर ये लोग यहाँ थोड़ी भी बहस करते तो हम लोगों ने पिटाई कर देनी थी। लेक़िन उनमें से वो वक़ील ने सभी को बचा लिया,इन लोगों की ज़मीन क्या बिक गई,पैर ज़मीन पर नहीं टिकते है। अब इतनी रात को ये परेशान हो जायँगे,नशे की हालत में पुलिस ने पकड़ा तो मुसीबत बढ़ जाएगी, और कमरा तो इन्हें कही मिलेगा नहीं,समझदार होंगे तो आज के सबक को जिंदगीभर याद रखेंगे।
बेशक़ इनके पास भी हथियार होंगे..लेक़िन जब हमारें ग्रामीण हथियार और डंडे चलते है तो कुछ काम नही करता। पुलिस भी हमारी पंचायत के आदेश विरुद्ध कार्यवाही नहीं करती।
(याद रहे हम लोग जौनसार क्षेत्र में थे और यह जौनसार जनजाति बाहुल्य क्षेत्र है।)
आधें घंटे बाद चाय पर चर्चा का समापन हुवा,ग्रामीण युवक और अंकल जी ने हम तीनों को कहा जाइये आप लोग आराम करो..अब हम यहीं सो रहे है।
अब हम बेफिक्र होकर सो सकते थे। फिर भी नींद आने में आधा घंटा लग ही गया...
अगली सुबह नीरज ने आँख खुलते ही रात की लाइव रिपोर्ट फेसबुक पर पोस्ट की। तो बहस हुई कि हरियाणा वालों को निशाना बना कर पोस्ट लिखी गई है, कई मित्रों को गलत लगा...

लेकिन मेरा मानना है कि एक ट्रेवल ब्लॉगर फेसबुक पोस्ट को भी यात्रा वृतांत की भांति जस का तस लिखता है,हरियाणा को हमनें टारगेट नही किया,यही कांड दिल्ली या इंदौर वालों द्वारा होता तब भी एक हमारी फेसबुक और ब्लॉग पोस्ट जस की तस ही आती। हमारा टारगेट दारू फ़्री टूरिज्म है,जिस प्रकार ड्रंक एंड ड्राइव जानलेवा है। उसी प्रकार ट्रैवल एंड वाइन ड्रिंक पार्टी पर्यावरण के लिए गलत और परिवार को लेकर घुमने वालो के लिए परेशानी पैदा करने वाला काम है। घुमने निकलें है तो केवल घूमिये और पूरे होश मे प्रकृति का आनंद लीजिए। फिर देखिए क्या मज़ा आता है।


अब कुछ फ़ोटोग्राफ़..

 टाइगर फॉल स्वागत द्वार 



 चकराता-टाइगर फॉल मार्ग




टाइगर फॉल पहुँच मार्ग

पार्किंग व अन्य शुल्क दर-टाइगर फॉल

यहाँ इन नियमों का पालन कहीं नही होता।

 टाइगर फॉल - प्रथम दर्शन

 सामने से..




एक वीडियो भी...



13 comments:

  1. बहुत ही शानदार वर्णन डॉ साहब

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    1. बहुत बहुत धन्यवाद अमित जी...

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  2. टाइगर फॉल मैं तब गया था जब कोई रास्ता नही था। कई खेतों से निकल कर तब पहुँचा था। अब बताते है कि पक्का रास्ता बन गया है। एक बार फिर से जाऊंगा टाइगर फॉल देखने। बाकी दारू बाज लोग हर जगह मिलते है। नीरज ने अंकल को बुलाकार उनको अच्छा सबक सीखाया।

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    1. धन्यवाद त्यागी जी...
      हाँ अब तो पक्का रास्ता बन गया है।
      उनको सबक सिखाना ज़रूरी था।

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  3. बहुत बढ़िया वर्णन...आजकल एक नया टूरिज्म शुरू हुआ है दारू टूरिज्म और इन सबको घूमने से कम ही मतलब रहता है इन्हें बस घर से निकल कर पीना है और एन्जॉय करना है...एन्जॉय तक तो ठीक है लेकिन किसी और को परेशान करना बहुत गलत है...

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    1. बहुत बहुत धन्यवाद प्रतिक जी...

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  4. दारू फ्री टूरिज्म।।
    ये अगर जो जाए तो स्वर्ग सा अहसास हो

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  5. सही कहा आपने..

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  6. एक बहुत शानदार पोस्ट .... समाज को संदेश देती पोस्ट । ये दारू टूरिज्म ने ही तो बेड़ा गर्क कर रखा है पर्यटक स्थलों का .... इसका बहिष्कार होना चाहिए और स्वस्थ और स्वच्छ घुमक्कड़ी लोगो को करनी चाहिये

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  7. टाइगर फॉल बहुत सुंदर है ... हम लोग झरने के सीधे नीचे तक गए थे

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    1. दारू टूरिज्म घुमक्कड़ और पर्यावरण दोनों के लिए नुकसानदेह है..सही कहा आपने..झरने पर अकेला पड़ गया था इसलिए फटाफट भाग आया..

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