Pages

Sunday, 12 August 2018

जोगी भड़क - इंदौर के पास सर्वश्रेष्ठ झरना

जोगी भड़क झरना / Jogi Bhadak Waterfall Of Indore

यात्रा दिनांक - 29 जुलाई 2018


अगर आप मानसून सीजन में इंदौर के आसपास पिकनिक स्पॉट की किसी से भी जानकारी लेंगे तो आप को पातालपानी जाने सलाह ज़रूर मिल सकती है। और जब सलाह मिलनी शुरू होती है तो, इंदौर के आसपास के पिकनिक स्पॉट की एक बड़ी पंक्ति तैयार हो जाती है। यह पंक्ति पातालपानी से शुरू होकर, तिन्छा फॉल, शीतलामाता फॉल, महेंदी कुंड, बामनिया कुंड, गिद्ध खोह तक चली जाती है। निःसंदेह यह सारी जगहें मानसून के दौरान और बाद में अतिदर्शनीय होती है। लेक़िन मानसून के सीजन में यहाँ भीड़ भी ठीक ठाक ही होती है। सप्ताहांत को पातालपानी पहुँच कर तो लगता है, सारा इंदौर यहीं आ गया। नतीज़न अगर आप एकांत और विशुद्ध प्राकृतिक दृश्यों की तलाश में वहाँ जाते है तो उससे से वंछित रह सकते है।

आज हम एक ऐसी जगह के बारे में बातें करेंगे जो इंदौर के बहुत पास है। और विशुद्ध प्राकृतिक रूप में है। और निश्चित ही एकांत में है। वो जगह है जोगी भड़क झरना।

वैसे महू-मानपुर के आसपास के लगभग सभी झरनों का स्त्रोत जानापाव पहाड़ी (श्री परशुराम जी की जन्मस्थली) से उद्गमित होने वाली नदियों से ही जुड़ा है। जानापाव पहाड़ी से चोरल नदी, चम्बल नदी,गम्भीर नदी और इनकी सहायक नदियों  - अजनार, कारम, अंगरेर, धमनी, नखेरी का उद्गम होता है।

जानापाव की पहाड़ी विंध्य रेंज का हिस्सा ही है। चम्बल नदी जानापाव पहाड़ी से उद्गमित होकर अपनी सहायक नदियों के साथ जब ढाल तक पहुँचती है तो जोगी भड़क झरने से एक घाटी में गिरती है। यह घाटी सर्पिलाकार लिए बहुत दूर तक फैली है। यहीं घाटी और झरना जोगी भड़क को एक खूबसूरत जगह बनाते है। यह जगह अब तक मध्यप्रदेश टूरिज्म के मानचित्र पर नहीं होने का कारण अपनी प्राकृतिक अवस्था मे ही है। आसपास रैलिंग या दीवार नही होने के कारण दूर से ही झरने के बढ़िया दीदार होते है। लेक़िन सुरक्षा का भी ध्यान हमें ही रखना होता है। 
अब अगर चम्बल नदी की यहाँ से आगें के सफ़र की बात करें तो, चम्बल नदी यहाँ से धार, रतलाम, मंदसौर, चित्तौड़, भिंड, मुरैना, होते हुवे धौलपुर में प्रवेश करती है और मुरैना और धौलपुर के बीच  मध्यप्रदेश व राजस्थान की सीमा रेखा बनाती है। चम्बल नदी ही राजस्थान की एक मात्र नदी है जो अन्तर्राज्यीय सीमा बनाती है। साथ ही राजस्थान के बढ़े हिस्से को संचित भी करती है। चम्बल, यमुना नदी की सहायक नदी है। अपने राजस्थान तक के सफ़र के बाद वो उत्तरप्रदेश के इटावा जिले के मुरादगंज में यमुना नदी के साथ सम्मिलित जाती है।
तो यह थी जोगी भड़क झरने की प्रमुख जानकारी। आप भी यहाँ जरूर जाइये, लेक़िन एक वादा अपने आप से करियेगा की आप वहाँ कोई गंदगी नहीं करेंगे। पन्नी,पानी की बोतल जैसा अपना कचरा अपने साथ वापस लेकर आएंगे। 

चलिये अब आपके संभावित प्रश्नों के जवाब देने की कोशिश करता हु।
1. जोगी भड़क कहाँ है, यहाँ कैसे पहुँचे ?

जोगी भड़क इंदौर से क़रीब 60 किलोमीटर की दूरी पर है और मानपुर के पास ढाल गाँव में स्थित है।
यहाँ पहुँचने के लिए इंदौर से ए.बी रोड़ पर  मुम्बई की ओर मानपुर से थोड़ा आगें जाना होता है। मानपुर घाट के समाप्त होते ही, दायीं ओर (सीधे हाथ की दिशा में) एक पक्की सड़क हिरापुर की ओर जाती है, ए.बी रोड़ से इधर ही मुड़ना होता है। इस छोटी सड़क के पहले बाएं मोड़ से (स्कूल के पास से) एक कच्ची सड़क ढाल गाँव की ओर जाती है। क़रीब एक किलोमीटर बाद तालाब के आगे सड़क समाप्त हो जाती है। यहीं गाड़ी की पार्किंग कर, कुछ पैदल चलना होता है। बस फिर आप जोगी भड़क पहुँच जाते है।
अगर झरने को और अच्छा दृश्य देखना चाहते है तो झरने के पीछे बने पुल को पार कर के सामने वाले पाट पर भी जा सकते है। वहाँ से झरने और सर्पिलाकार घाटी का दृश्य बहुत सुंदर दिखाई देता है।

2. जोगी भड़क झरना देखने का सबसे अच्छा मौसम ?
गर्मी के मौसम को छोड़कर कभी भी जा सकते है। मानसून शुरू होते ही यहाँ की रंगत बिल्कुल हरी हो जाती है, और यही बेस्ट टाइम है इस जगह जाने का, लेक़िन अधिक बारिश के समय आखरी 1 किलोमीटर के कच्चे मार्ग पर कीचड़ फ़िसलन हो सकती है। इससे बचने के लिए मानसून के बाद का समय भी ठीक रहता है।

3. खाने की व्यवस्था ?
 जोगी भड़क के आसपास छोटे गाँव ही है, आसपास किसी प्रकार की व्यावसायिकता नहीं है। आपकों खाना-पानी घर से ही ले जाना चाहिए। घर से नही ले जा रहे है तो जाते समय मानपुर से भी ले सकते है।

4. पहुँचने के साधन ?
 केवल निजी वाहन से ही जा सकते है। चार पहिया वाहन भी ले जा सकते है। किसी भी वाहन से जाइये आखरी के 1-2 किलोमीटर पैदल जाना होता है। वैसे सड़क निर्माण कार्य प्रगति पर है..निर्माण पूर्ण होने के बाद कोई दिक्कत नही आएगी।
अब कुछ फ़ोटोग्राफ़ देखिए।
मानपुर-घाट-थोड़ा आगे से दाएं मोड़ पर ढाल गाँव के लिए मुड़ना होता है।


खूबसूरत मंज़िलो की राहें भी कम खूबसूरत नही होती है।

जोगी भड़क के आसपास के गाँव भी खूबसूरत है..ऐसे ही एक गाँव,हिरापुर के पास का दृश्य..

साथ में नन्हें घुमक्कड़ कियान और उनकी दादी भी थे..

कियान की मम्मी- दीप्ति भी साथ थी..


महू-मानपुर क्षेत्र में सागवान के पेड़ भी बहुत है..

 हैल्लो और कितना बाक़ी है..?

 ये लो जी आ गया..

झरने के आगे की घाटी भी बहुत खूबसूरत है..आगें जाकर सर्पिलाकार हो जाती है। इस बार तो उधर नही गया। फिर कभी जाऊँगा।






गूगल मैप ने हमें हिरापुर वाले रास्ते से जोगी भड़क पहुँचाया था। यह रास्ता थोड़ा घूमते हुवे जोगी भड़क के पास पहुँचता है। जबकि ढाल होते हुवे जाने पर दुरी 8 किलोमीटर कम रहती है। हिरापुर में इन बच्चों से जोगी भड़क झरने की राह पूछी तो ये हमें खुद ही झरने तक ले गए। चारों के नाम है- देवकन्या, शिवकन्या, ऋतुकन्या, विमला।

बेशक वे हमारे साथ कुछ खाने और पैसों के लालच में आये होंगे। हमने भी उन्हें निराश नही किया। आखिर वे हमारी गाइड बनी थी।
एक फोटू हमारा भी..

एक वीडियो भी है..



6 comments:

  1. एक और नयी जगह का पता चला।

    ReplyDelete
    Replies
    1. जी संजय जी..बिल्कुल..कम प्रसिद्ध जगह है।

      Delete
  2. बहुत अच्छी जगह है ।

    कभी मुझे भी ले चलिएगा ।

    ReplyDelete
    Replies
    1. जी सर बिल्कुल.. धन्यवाद आपका।

      Delete
  3. वाह मनोरम दृश्य

    ReplyDelete